मुहम्मदाबाद। डकोर कोतवाली क्षेत्र के रमपुरा गांव में पकड़ी गई एमडी ड्रग्स फैक्टरी का नेटवर्क जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है। छापेमारी के दौरान दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जबकि कथित फैक्ट्री संचालक शैलेंद्र पाल अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर है।
डीआरआई और एटीएस की टीमें उसके साथ जुड़े लोगों की तलाश में जुटी हैं। जांच में कानपुर, मुंबई और झांसी तक नेटवर्क के तार जुड़े होने की आशंका सामने आ रही है। एजेंसियां संदिग्ध मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल खंगालकर नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी हैं।
जांच में सामने आया है कि महाराष्ट्र के सांगली जिले के संतोष गवली की मुलाकात हमीरपुर निवासी हेमंत कुशवाह से हुई थी। इसके बाद दोनों की मुलाकात रमपुरा निवासी शैलेंद्र पाल से हुई। बताया जा रहा है कि इस संपर्क के बाद ही रमपुरा में गतिविधियां शुरू हुई थीं। छापेमारी के समय शैलेंद्र मौके पर नहीं मिला। ऐसे में यह भी जांच की जा रही है कि क्या उसे कार्रवाई की पहले से भनक लग गई थी।
सूत्रों के मुताबिक, झांसी के कुछ लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। हालांकि, नेटवर्क के विस्तार और इसमें शामिल लोगों को लेकर एजेंसियों की जांच अभी जारी है।
करोड़ों के कारोबार की भनक तक नहीं लगी, खुफिया तंत्र पर सवाल
गांव से लेकर शहर तक संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने वाली एलआईयू को रमपुरा में संचालित एमडी ड्रग्स फैक्टरी की जानकारी क्यों नहीं मिली, यह सवाल उठने लगा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सामान्य घटनाओं की जानकारी भी खुफिया तंत्र के माध्यम से अधिकारियों तक पहुंच जाती है, लेकिन इतने बड़े कथित अवैध कारोबार की भनक नहीं लग सकी। करोड़ों रुपये के कारोबार से जुड़े इस मामले के खुलासे के बाद स्थानीय खुफिया निगरानी और सूचना तंत्र की सक्रियता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में एलआईयू की भूमिका को लेकर अभी कोई आधिकारिक जांच निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
28 गांवों की निगरानी के लिए 22 चौकीदार, रमपुरा में तैनाती नहीं
डकोर कोतवाली क्षेत्र के 28 गांवों की निगरानी के लिए वर्तमान में 22 चौकीदार तैनात बताए जा रहे हैं। पहले इन गांवों में 23 चौकीदार थे, लेकिन एक की मृत्यु के बाद संख्या घट गई। ग्रामीणों के मुताबिक, रमपुरा गांव में चौकीदार की तैनाती नहीं थी। गांवों की गतिविधियों की जानकारी थाना पुलिस तक पहुंचाने में चौकीदारों की अहम भूमिका होती है। ऐसे में रमपुरा में चौकीदार नहीं होने के कारण स्थानीय स्तर पर पुलिस को सूचनाएं मिलने का माध्यम सीमित था। हालांकि, सवाल यह भी है कि लंबे समय तक फैक्टरी संचालित होने के दौरान अन्य सूचना तंत्र को इसकी जानकारी क्यों नहीं हो सकी।
फैक्टरी स्थल पर पुलिस का पहरा, वाहन और सामान सीज
एमडी ड्रग्स फैक्ट्री का खुलासा होने के बाद संबंधित परिसर की निगरानी बढ़ा दी गई है। गौशाला के आसपास भी पुलिसकर्मियों की दिन-रात ड्यूटी लगाई जा रही है। छापेमारी के दौरान डीआरआई और एटीएस की टीमें दो पिकअप वाहनों में केमिकल तैयार करने से जुड़ा सामान अपने साथ ले गई थीं। वहीं, मौके से एक चार पहिया वाहन, दो बाइक, जेनरेटर और पानी का टैंकर समेत अन्य सामान सीज किया गया था। डकोर पुलिस के जवान सीज किए गए वाहनों और सामान की सुरक्षा में तैनात हैं। जांच एजेंसियां बरामद सामग्री और अन्य साक्ष्यों के आधार पर फैक्टरी के संचालन से जुड़े लोगों की भूमिका खंगाल रही हैं।
अब जांच का सबसे अहम पहलू फरार संचालक शैलेंद्र पाल की गिरफ्तारी और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करना है। उसकी गिरफ्तारी के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रमपुरा की फैक्ट्री से एमडी ड्रग्स का कारोबार किन-किन शहरों और लोगों तक फैला था।
