झांसी। बदलती जीवनशैली, नशे की लत, बेरोजगारी और पति-पत्नी के बीच बढ़ता विवाद पारिवारिक कलह की बड़ी वजह बन रहे हैं। सोशल मीडिया पर बढ़ता संपर्क, क्षणिक आकर्षण और एक-दूसरे पर शक भी वैवाहिक रिश्तों में दरार डाल रहे हैं। छोटी-छोटी बातों पर शुरू होने वाले विवाद कई बार परिवार टूटने की नौबत तक पहुंच रहे हैं। ऐसे मामलों में परिवार परामर्श केंद्र की भूमिका अहम हो जाती है।

परिवार परामर्श केंद्र से जुड़ी नीति शास्त्री ने बताया कि वैवाहिक विवादों के पीछे कई तरह के कारण सामने आ रहे हैं। मायके पक्ष का ससुराल में जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप, ग्रामीण क्षेत्रों में कामकाजी महिलाओं पर पति का शक और आपसी विश्वास की कमी भी विवाद की प्रमुख वजह हैं। इसके अलावा बढ़ती महत्वाकांक्षाएं, पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर मतभेद और बुजुर्गों को साथ रखने तथा उनकी देखभाल को लेकर असहमति भी पति-पत्नी के बीच तनाव बढ़ा रही है।

उन्होंने बताया कि परामर्श केंद्र में दोनों पक्षों को तीन या इससे अधिक बार बुलाकर बातचीत कराई जाती है। कोशिश रहती है कि आपसी समझ और सहमति से परिवार को टूटने से बचाया जा सके। समझौता होने पर दोनों पक्ष भविष्य में विवाद न करने का लिखित आश्वासन भी देते हैं।

20 मामले अभी लंबित

एक जनवरी से अक्टूबर तक परिवार परामर्श केंद्र में कुल 128 शिकायतें पहुंचीं। इनमें से 40 मामलों का आपसी समझौते से निस्तारण कराया गया, जबकि 60 मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई। 20 मामले अभी लंबित हैं और आठ अन्य श्रेणी में रखे गए हैं।

परिवार परामर्श केंद्र में होती है सुनवाई

परिवार से जुड़े विवादों को सुनकर उनका काउंसलिंग के माध्यम से निराकरण करने का काम महिला थाना स्थित परिवार परामर्श केंद्र में किया जाता है। अगर बातचीत से समाधान हो गया तो ठीक वरना प्राथमिकी दर्ज कराने का भी प्रावधान है। वहीं परिवार न्यायालय परिसर में मध्यस्थता केंद्र है। इसमें केवल उन्हीं मामलों की सुनवाई होती है जो न्यायालय में पंजीकृत हैं।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *