उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समीकरण की घेराबंदी के लिए भाजपा ने राष्ट्रवाद, सुशासन और विकास का आक्रामक चुनावी एजेंडा तैयार किया है। पार्टी विपक्ष की जातीय गोलबंदी का जवाब सरकार की उपलब्धियों से देगी। साथ ही सपा शासनकाल की अराजकता और खराब कानून-व्यवस्था को चुनाव प्रचार का प्रमुख हथियार बनाया जाएगा।
गोरखपुर में बुधवार को हुई भाजपा कोर कमेटी की बैठक में चुनावी रणनीति को लेकर इन मुद्दों पर विस्तार से मंथन हुआ। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के दो दिवसीय गोरखपुर दौरे के दौरान हुई बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी तथा प्रदेश महामंत्री धर्मपाल सिंह समेत कोर कमेटी के प्रमुख सदस्य शामिल हुए। बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव के राजनीतिक समीकरणों, विपक्ष की रणनीति और भाजपा के चुनावी अभियान की दिशा पर चर्चा हुई।
बैठक में प्रदेश को छह प्रमुख क्षेत्रों में बांटकर, मोदी, अमित शाह समेत भाजपा और सहयोगी दलों के बड़े नेताओं की बड़ी रैलियां और जनसभाएं आयोजित करने की रणनीति पर चर्चा हुई। बैठक में तय किया गया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, ब्रज, रुहेलखंड, अवध, बुंदेलखंड और पूर्वांचल में क्षेत्रवार कार्यक्रमों के जरिये पार्टी संगठन और जनसमर्थन को मजबूत करेगी। पूर्वांचल को विशेष प्राथमिकता देने पर जोर रहा। इन आयोजनों के जरिए केंद्र और प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक भाजपा चुनाव प्रचार में सपा शासनकाल की कानून-व्यवस्था को प्रमुखता से उठाएगी। पार्टी का प्रयास होगा कि जनता के बीच यह संदेश पहुंचे कि भाजपा सरकार ने प्रदेश में कानून का राज स्थापित किया है, जबकि सपा शासन में अराजकता और अपराध की स्थिति रही। राष्ट्रवाद को भी विपक्ष के जातीय एजेंडे के मुकाबले मजबूत राजनीतिक मुद्दे के रूप में पेश किया जाएगा।
विकास परियोजनाएं बनेंगी चुनावी हथियार
बैठक में विकास कार्यों को चुनावी अभियान का महत्वपूर्ण आधार बनाने पर भी जोर दिया गया। एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, सड़क, आधारभूत ढांचे का विस्तार, औद्योगिक निवेश और रोजगार की संभावनाओं को प्रमुखता से प्रचारित किया जाएगा। भाजपा की रणनीति है कि सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों के सहारे विपक्ष के पीडीए समीकरण को चुनौती दी जाए।
