झांसी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. सुशील कुमार सिंह ने बुंदेलखंड के किसानों को रबी मौसम में मसूर की वैज्ञानिक खेती अपनाने की सलाह दी है। डॉ. सिंह ने बताया कि बुंदेलखंड की मार और काबर मिट्टी मसूर की खेती के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है। इन मिट्टियों में नमी संचयन क्षमता अधिक होने से कम सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है।
मसूर की बुवाई के लिए नवंबर का पहला पखवाड़ा सबसे उपयुक्त है। आईपीएल-220, आईपीएल-315, आईपीएल-316, आईपीएल-329, आईपीएल-534, एल-4717 और एल-4727 उन्नत प्रजातियां हैं। आईपीएल-220 में आयरन और जिंक की अधिक मात्रा पाई जाती है। यह पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण दलहनी फसल है। मसूर की फसल सामान्यतः 120 से 130 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। भारत सरकार ने मसूर का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 7390 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। संवाद