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– फोटो : AI Image
विस्तार
यूपी के पावर कॉरिडोर में ऐसे-ऐसे कारनामे होते रहते हैं जिनसे विभागों की पोल खुल जाती है। ‘सुना है क्या’ कॉलम में हम आपके लिए लेकर आते हैं ऐसे ही किस्से जिन पर अंदर ही अंदर हलचल मची हुई है। पढ़ें, ये किस्से:
खोदा पहाड़, निकली चुहिया
कई दिनों से सुस्त पड़ी एक केंद्रीय एजेंसी ने कुछ कारोबारियों के ठिकानों पर छापा मारा, लेकिन मामला बन नहीं पाया। काफी मशक्कत के बाद भी एजेंसी के कद के मुताबिक बरामदगी नहीं हुई। घंटों की जांच के बावजूद ऐसा कुछ हाथ नहीं लगा, जो उसके टारगेट के आसपास होता। अब इसकी वजह चाहे जो हो, विभाग में चर्चा है कि यह तो खोदा पहाड़, निकली चुहिया जैसा हो गया। अब भला उन्हें कौन बताए कि बड़े ठिकानों पर जांच करने जाने में नुकसान का खतरा भी रहता है। लिहाजा, छोटों को ही निपटाते रहो।
दो बड़े भिड़े, फजीहत बड़े-बड़ों की
कंस्ट्रक्शन मार्केट के दो बड़े प्लेयर आपस में भिड़ गए। पहले ने दूसरे की टेंडर डालने की क्षमता पर सवाल उठाए तो दूसरे ने रामनगरी के एक नौकरशाह से ऐसी जुगत भिड़ाई कि पहले वाले के खिलाफ रात तीन बजे एफआईआर दर्ज करा दी। उसे सिफारिश लगाने तक का मौका नहीं मिला। अब इस लड़ाई में बड़े नौकरशाहों की फजीहत हो रही है और उनकी पोल-पट्टी खुल रही है। चर्चा है कि मामला मैनेज करने के लिए दिवाली के मौके पर दो करोड़ रुपये इकट्ठा किए गए हैं।
गजब का पुलिस कमिश्नरेट!
सूबे के एक पुलिस कमिश्नरेट में इन दिनों पुलिसिंग से ज्यादा अफसरों की खींचतान सुर्खियों में है। चर्चा है कि एक अफसर अपनी अलग हनक बनाए रखने के चक्कर में कमिश्नरेट के मुखिया को भी दरकिनार करने से नहीं चूकते। दूसरे नंबर के अफसर से भी उनकी नहीं पटती। दोनों के बीच ऐसी अदावत है कि एक-दूसरे की बात सुनना भी गवारा नहीं। किसी घटना के बाद जब दोनों की टीमें सक्रिय होती हैं तो मातहतों को समझ नहीं आता कि किसका आदेश मानें। ऐसे में पुलिसकर्मियों के सामने कानून-व्यवस्था संभालने के साथ अफसरों के बीच तालमेल बैठाने की भी चुनौती रहती है।
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