झांसी। दिवाली पर शहर के घर-आंगन रोशनी से जगमगा रहे हैं। लोग अपने घरों को सजाने-संवारने और खुशियां मनाने में जुटे हैं, लेकिन मेजर ध्यानचंद स्टेडियम के हॉकी छात्रावास में रहने वाले खिलाड़ियों की जिंदगी में बदहाली का अंधेरा छाया है।
यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करने का दावा किया जाता है, लेकिन करीब 25 खिलाड़ियों को बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझना पड़ रहा है। किसी कमरे में पंखे खराब पड़े हैं तो कहीं शौचालयों के दरवाजे तक नहीं हैं। तीन-तीन खिलाड़ी एक कमरे में रहने को मजबूर हैं।
खराब पंखे, मच्छरों के बीच कट रही रात
छात्रावास के अधिकतर कमरों में तीन-तीन खिलाड़ी एक साथ रहते हैं। कमरों में लगे छत वाले पंखे खराब पड़े हैं। हालत यह है कि पंखे छत से लटक तो रहे हैं, लेकिन हवा देने के बजाय महज शोभा बढ़ा रहे हैं। गर्मी और उमस के बीच खिलाड़ियों को बिना पंखे के रात गुजारनी पड़ती है। छात्रावास में मच्छरों की भी भरमार है। दिनभर हॉकी का अभ्यास करने के बाद खिलाड़ियों को कमरों में आराम तक नहीं मिल पाता। इसके अलावा छात्रावास में लगा वाटर कूलर भी खराब है। सुविधाओं की कमी के बीच खिलाड़ियों की परेशानी लगातार बनी हुई है।
पानी और शौचालय की व्यवस्था भी बदहाल
छात्रावास में पानी की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है। पूरे भवन में केवल एक वाटर कूलर लगा है, जो निचले तल पर है। ऊपर के कमरों में रहने वाले खिलाड़ियों को ठंडा पानी लेने के लिए नीचे आना पड़ता है। शौचालयों की स्थिति और भी खराब है। कई शौचालयों के दरवाजे नहीं हैं। इससे खिलाड़ियों की निजता प्रभावित हो रही है। बुनियादी सुविधाओं की यह स्थिति ऐसे छात्रावास में सामने आई है, जहां रहने वाले खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है।
सरकारी दावों और हकीकत में अंतर
सरकार खेलों और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। खेल प्रतिभाओं को तराशने और उन्हें बेहतर प्रशिक्षण देने के दावे भी किए जाते हैं। दूसरी ओर, मेजर ध्यानचंद स्टेडियम के हॉकी छात्रावास में पंखे, पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण देने के साथ उनके रहने और आराम की व्यवस्था दुरुस्त रखना भी जरूरी है। लेकिन छात्रावास की मौजूदा स्थिति सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर दिखा रही है। संवाद
वर्जन
छात्रावास में खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं दुरुस्त कराई जाएंगी। खराब पंखों, कूलर, वाटर कूलर और वॉशरूम की समस्याओं को संज्ञान में लेकर उनका समाधान कराया जाएगा, ताकि खिलाड़ियों को असुविधा न हो।
– कर्मवीर सिंह, क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी
