= गुलाबजल बनाने की आड़ में चल रहा था नशीले पदार्थों के निर्माण का खेल, मुंबई और हमीरपुर के दो आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार
संवाद न्यूज एजेंसी
मुहम्मदाबाद। डकोर कोतवाली क्षेत्र के रमपुरा गांव में पकड़ी गई ड्रग्स फैक्टरी के मामले में मुख्य संचालक शैलेंद्र पाल अभी भी जांच एजेंसियों की गिरफ्त से बाहर है। डीआरआई और एटीएस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए मुंबई निवासी संतोष गावली और हमीरपुर जिले के गोहांड निवासी हेमंत को गिरफ्तार किया था। दोनों से पूछताछ के बाद नशीले पदार्थों के निर्माण और उनकी आपूर्ति से जुड़े नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, रमपुरा गांव में गुलाबजल बनाने की आड़ में फैक्टरी का संचालन किया जा रहा था। बाहर से यह सामान्य कारोबार दिखाई देता था, लेकिन अंदर नशीले पदार्थों के निर्माण का काम चलने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियों ने छापेमारी के दौरान कई अहम जानकारियां जुटाई थीं। कार्रवाई के दौरान हेमंत के घर से भी ड्रग्स बरामद की गई थी। इसके बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया था। अब एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल थे और तैयार किए जा रहे नशीले पदार्थों की आपूर्ति कहां की जानी थी।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपियों की योजना बड़े स्तर पर ड्रग्स का निर्माण करने की थी। इसके लिए वे करीब एक महीने बाद जिले के जंगल क्षेत्र में जमीन खरीदने की तैयारी में थे, जहां बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थ बनाने का काम शुरू किया जाना था। हालांकि, योजना को अमलीजामा पहनाने से पहले ही एजेंसियों ने कार्रवाई कर दी। इससे संभावित बड़े नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है।
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मुख्य संचालक की भूमिका की पड़ताल
इस पूरे मामले में शैलेंद्र पाल की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, उसकी गिरफ्तारी नहीं होने के कारण कारोबार के संचालन, निवेश, कच्चे माल की व्यवस्था और तैयार ड्रग्स की आपूर्ति से जुड़े कई पहलुओं की तस्वीर अभी साफ नहीं हुई है। एजेंसियां गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। अब देखना होगा कि शैलेंद्र पाल की गिरफ्तारी के बाद इस कथित कारोबार से जुड़े कितने और नाम सामने आते हैं।
