झांसी- जल बजट भारत में एक अत्यधिक समसामयिक और महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। यदि समुदाय अपने गाँव का जल बजट बनाना शुरू कर दे, तो निश्चित रूप से पानी के विवेकपूर्ण उपयोग की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। यही विचार पिछले दिनों बबीना ब्लाक के ग्राम पंचायत ढिकौली में आयोजित एक संगोष्ठी में जल सहेलियों ने साझा किया।
इस संगोष्ठी में जल सहेलियों ने जल बजट बनाने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया और गांव के समुदाय को इसके महत्व से अवगत कराया। परमार्थ संस्था द्वारा शुरू किए गए इस प्रयास के तहत जल सहेलियों ने न सिर्फ खुद जल बजट बनाना सीखा, बल्कि ढिकौली में समुदाय को भी इसके बारे में सिखाने का काम किया है।
परमार्थ संस्था बुन्देलखण्ड के कई गांवों में जल संकट से निपटने और जल संरक्षण की दिशा में जल बजट की उपयोगिता को समझा रही है। इसी के माध्यम से गांवों को पानीदार बनाने की मुहिम को बढ़ावा दिया जा रहा है।
संगोष्ठी के दौरान, वर्ल्ड बैंक और एनपीएमयू की टीम ने ग्राम में बनाए गए जल संरचनाओं का निरीक्षण किया, जिसमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग, चैकडेम और अमृत सरोवर प्रमुख थे। इन प्रयासों की सराहना करते हुए टीम ने जल संरक्षण के महत्व को भी रेखांकित कियासाथ ही परमार्थ के कार्यकर्त्ता को सम्मानित भी किया |
इस दौरान जल सुरक्षा योजना 2024-25 पर भी विचार विमर्श हुआ, ताकि आने वाले वर्षों में जल संकट को और भी प्रभावी तरीके से हल किया जा सके।
