उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, जिसमें अब एक साल से भी कम समय बचा है। राजनीतिक दल अपनी चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं। इसी क्रम में, अमर उजाला की टीम ने ‘सक्षम यूपी’ कार्यक्रम के तहत झांसी जिले का दौरा किया। इस पड़ताल का मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं के आम जनजीवन पर पड़े असर को जानना था। टीम ने जिले में सरकार के विकास के दावों की असल तस्वीर जानने का प्रयास किया। यह दौरा आगामी विधानसभा चुनाव से पहले जमीनी हकीकत को टटोलने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पड़ताल के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्यों की समीक्षा की गई। इसका लक्ष्य यह समझना था कि सरकारी नीतियों का स्थानीय लोगों पर कितना प्रभाव पड़ा है। टीम ने यह भी देखा कि विकास के वादे कितने पूरे हुए हैं।

ओडीओपी से किस तरह का लाभ मिला है?

झांसी के युवा उद्यमी सुभाष पचौरी ने बताया कि इसके पहले हमारे यहां पीढ़ी दर पीढ़ियों का काम होता आया है। और यह पहले हमारा साधारण में था। ओडीओपी में नहीं था। 2022-23 के बाद से हमारा ओडीयूपी में आया है। तब से इसका काफी ग्रोथ हुआ है। हमको सप्लाई भी मिली है। अन्य जगह जाने के लिए ओडीयूपी महोत्सव भी लगते हैं। हमको माल बेचने के लिए भी वहां से ऑफर आए हैं। अच्छे रेट पर हमारा माल बिका है। इसके पहले आर्थिक स्थिति भी हम लोगों की थोड़ी डाउन थी। लेकिन अभी यह ओडीओपी में जो स्कीम आई है। लोन की तो उसमें हमने वो किया था अप्लाई तो हमारा 10 लाख का लोन हुआ है। अब हमारी आर्थिक स्थिति भी बढ़िया हो गई है। हमें जो जो धागे की जरूरत पड़ती थी बाहर से तो आर्थिक स्थिति कम होने के कारण हम ले नहीं पाते थे। तो जब से हमारा लोन हुआ है तब से हमारे पास पैसा भी पर्याप्त हो गया है। अब हम जैसा भी धागा चाहे हम ला सकते हैं। इसमें हमारा एक लाख रुपये का लोन हुआ था। इस समय करीब 20 से 25 लोग को हम खुद रोजगार दे रहे हैं। इसमें करीब हमारा सर साल में करीब 30 से 40 लाख का आराम से टर्नओवर हो जाता है और बढ़िया माल बन रहा है। 

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पर्यटन को मिला नया आकर्षण?

स्थानीय निवासी राघवेंद्र पटेल से पूछा कि कैसा था पहले पार्क तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि नहीं पहले 2016 और 14 के लगभग तब यहां जंगल था। दिन में निकलने में दिक्कत होती थी। आज देख लो कितना विकास हो गया। काम तो हुआ है। नहीं बहुत बढ़िया है माननीय योगी आदित्यनाथ जी ने बहुत विकास किया। बहुत शहरों में विकास किया और हम यही चाहते हैं कि वो इस बार भी आए। बहुत अच्छा लगता है। हां यहां लोग पार्क में आते हैं। घूमते हैं। हां रोजगार तो मिला है। जब लोग आएंगे तो रोजगार बढ़ेगा। क्यों नहीं बढ़ेगा? 

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मेजर ध्यानचंद स्टेडियम के कायाकल्प से कितना फायदा?

हॉकी प्रशिक्षक सुजीत तिवारी ने बताया कि मैं यहां हॉकी प्रशिक्षक छात्रावास झांसी के लिए पोस्ट होके अभी आया 15 जुलाई 2025 में।  योगी सरकार हमारी जो है जैसे नई हॉकी में एस्ट्रोटफ जो नई टेक्नोलॉजी है। पहले हमारे हॉकी ग्रास ग्राउंड पर होते थे। जिस पर बाल बहुत बम करके आते थे। एस्ट्रोटफ की हॉकी है। इसमें टेक्निकल और टेक्निकल है। इस पर काफी फास्ट हॉकी खेली जाती है। ताकि एक खिलाड़ी को अच्छी मुकाम पर जाने के लिए, अच्छी इस पर प्रैक्टिस हो। तमाम तरीके की जैसे हॉस्टल हो गए, अपना स्टेट हॉस्टल, प्रशिक्षण अच्छा मिल सके। ग्रास ग्राउंड की जो हॉकी है, वो बहुत स्लो है। जो हमारी मेन हॉकी इंटरनेशनल लेवल पर जो हमारी टीम खेल रही है। इंडियन टीम के लिए तैयार होते हैं। वो एस्ट्रोटफ से ही जाते हैं। ट्रेनिंग अच्छी की दी जाती है। क्योंकि जो भी पहले कोचेस हैं। ग्रास ग्राउंड से ग्रास रूट से उठ के आते थे। खिलाड़ी भी हमारे ग्रास रूट पर ही करते थे। अब जो है स्टार्टिंग से हमारे कोचेस को नेशनल एस्ट्रोटर्फ मिल गया है। हमारे इंडिया के अंदर इसकी 40-42 की संख्या है। इस पर टेक्निकल तथा टेक्टिकल सिखाने में और खिलाड़ियों को समझने में अच्छी मदद मिलता है।

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