झांसी। बीए की छात्रा को लगातार परेशान कर आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में अदालत ने रामजी यादव को सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। एडीजे सत्य प्रकाश आर्य की अदालत ने शनिवार को फैसला सुनाते हुए दोषी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। वहीं, साक्ष्य के अभाव में उसके पिता राधेलाल को दोषमुक्त कर दिया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, ककरबई थाना क्षेत्र के एक गांव की 20 वर्षीय छात्रा बीए अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रही थी। 10 नवंबर 2021 को उसने खुद पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा ली थी। गंभीर रूप से झुलसने के कारण उसकी मौत हो गई थी। घटना के बाद छात्रा के पिता ने ककरबई थाने में तहरीर देकर गांव के रामजी यादव पर बेटी को परेशान करने का आरोप लगाया था। पुलिस ने रामजी यादव और उसके पिता राधेलाल के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया था।
बातचीत करने का दबाव बनाकर करता था परेशान
मृतका के पिता ने पुलिस को बताया था कि रामजी यादव उनकी बेटी को लगातार परेशान करता था। वह उस पर बातचीत करने का दबाव बनाता था। इससे उनकी बेटी मानसिक रूप से परेशान रहती थी। पुलिस ने जांच के बाद रामजी यादव को गिरफ्तार कर लिया था।
दीवार पर लिखा था रामजी और उसके पिता का नाम
आत्महत्या से पहले छात्रा ने घर की दीवार पर रामजी यादव और उसके पिता राधेलाल का नाम लिखा था। दीवार पर लिखे संदेश में उसने रामजी को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया था। सुनवाई के दौरान यह साक्ष्य भी अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में प्रस्तुत किया गया। एडीजीसी पुष्पेंद्र राजपूत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए तर्क और साक्ष्य रखे। इनके आधार पर अदालत ने रामजी यादव को दोषी ठहराते हुए सात साल के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, साक्ष्य के अभाव में राधेलाल को दोषमुक्त कर दिया।
