झांसी। नबावाद थाने में चार अधिवक्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अधिवक्ता-पुलिस विवाद और गहरा गया है। शनिवार को पुलिस ने घटना से जुड़े तीन सीसीटीवी फुटेज जारी किए। इनमें दो फुटेज में अधिवक्ताओं की भीड़ उपनिरीक्षक मोहित कुमार और सिपाही भूपेंद्र के साथ धक्कामुक्की करती नजर आ रही है।
वहीं, तीसरे फुटेज में कोतवाली प्रभारी अंजन कुमार सिंह के कक्ष में अधिवक्ता रोमेश अग्रवाल और विनय के बीच बातचीत का दृश्य है। उधर, प्रशासनिक न्यायमूर्ति समित गोपाल के साथ हुई बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने उन्हें भी ये फुटेज दिखाए।
कोतवाली प्रभारी के कक्ष का 26 सेकेंड का फुटेज बुधवार शाम 7:12 बजे का है। इसमें कोतवाली प्रभारी अपनी कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं। इसी दौरान अधिवक्ता रोमेश अग्रवाल उनके कक्ष में प्रवेश करते हैं। फुटेज में सुनाई दे रही बातचीत में कोतवाली प्रभारी अंजन सिंह उनसे बाहर जाने और बाद में बात करने को कहते सुनाई दे रहे हैं। इस पर रोमेश कहते हैं कि उन्हें बात करनी है। तभी सामने कुर्सी पर बैठे विनय कहते हैं कि रोमेश उनके मामले में पैरवी करेंगे। इस पर कोतवाली प्रभारी कहते सुनाई देते हैं कि जब उनकी बात न सुनी जाए, तब वे जिसकी मदद लेनी हो, उसकी मदद लें। इसके बाद रोमेश कक्ष से बाहर चले जाते हैं। कुछ देर बाद विनय भी बाहर जाते दिखाई देते हैं।
गौरतलब है कि अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया था कि कोतवाली प्रभारी अंजन सिंह ने अधिवक्ता रोमेश अग्रवाल के साथ गालीगलौज कर उन्हें अपमानित किया। इसके विरोध में शुक्रवार को बड़ी संख्या में अधिवक्ता कलेक्ट्रेट में जुटे थे। जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष प्रमोद शिवहरे की अगुवाई में अधिवक्ता ज्ञापन देने जा रहे थे। इसी दौरान पुलिसकर्मियों से उनकी झड़प हो गई। विवाद के बाद पुलिस ने घटना से जुड़े तीनों फुटेज जारी किए।
एसपी सिटी प्रीति सिंह ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज की जांच में कोतवाली प्रभारी की ओर से दुर्व्यवहार किए जाने की बात सामने नहीं आई है। कलेक्ट्रेट परिसर में लगे कैमरों के फुटेज में दरोगा और सिपाही के साथ धक्कामुक्की तथा मोबाइल छीनने की घटना कैद हुई है। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में अधिवक्ताओं के खिलाफ विवेचनाएं चल रही हैं और दबाव बनाने के लिए यह कृत्य किया गया। बता दें कि पुलिस-अधिवक्ता विवाद के बाद नवाबाद थाने में जेल चौकी प्रभारी मोहित कुमार की तहरीर पर चार अधिवक्ताओं के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिसकर्मियों से मारपीट करने और मोबाइल लूटने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
प्राथमिकी वापस न होने पर 2 से आंदोलन का अल्टीमेटम
झांसी। अधिवक्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने और संबंधित थानाध्यक्षों पर कार्रवाई न होने के विरोध में जिला अधिवक्ता संघ ने आंदोलन की चेतावनी दी है। शनिवार को संघ की बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि अधिवक्ताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए गए और संबंधित थानाध्यक्षों पर कार्रवाई नहीं हुई तो दो नवंबर से अधिवक्ता अनिश्चितकालीन न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे।
बैठक में अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस मनमाने तरीके से काम कर रही है। खासकर नवाबाद, सीपरी बाजार और कोतवाली थाने में उनकी शिकायतों पर सुनवाई नहीं होती। उन्होंने संबंधित थानाध्यक्षों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। बैठक के बाद अधिवक्ताओं ने जिला न्यायाधीश के माध्यम से जनपद के प्रशासनिक न्यायमूर्ति समित गोपाल को ज्ञापन सौंपकर पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। प्रशासनिक न्यायमूर्ति ने एसएसपी से वार्ता करने का भरोसा दिलाया।
इस दौरान जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष प्रमोद शिवहरे, महामंत्री छोटेलाल वर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अभिनंदन प्रजापति, कनिष्ठ उपाध्यक्ष यशोवर्धन बजाज, कोषाध्यक्ष विनय शिवहरे, संयुक्त सचिव प्रकाशन रोमेश अग्रवाल, संयुक्त सचिव लाइब्रेरी अमित कुमार पचौरी समेत अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे।
