झांसी। बुंदेलखंड में सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए गरौठा तहसील में 100 मेगावाट क्षमता का सोलर पावर प्रोजेक्ट स्थापित करने की तैयारी है। परियोजना के लिए करीब 601 एकड़ जमीन आवंटित की गई है, लेकिन सरकारी और निजी भूमि के एक ही गाटा में मिश्रित होने के कारण जमीन का सीमांकन और तरमीम करना चुनौती बन गया है। अब एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी की ओर से डीएम को पत्र लिखा गया है।
गरौठा तहसील के छह गांवों में 601 एकड़ भूमि पर यह परियोजना स्थापित की जानी है। इसके लिए एनटीपीसी यूपी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड को यूपीनेडा के जरिये भूमि आवंटित की गई है। परियोजना के तहत 100 मेगावाट का सोलर पावर प्लांट के साथ ही 50 मेगावाट क्षमता का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम स्थापित होना है। एनटीपीसी की ओर से भूलेख और भू-नक्शा अभिलेखों के आधार पर जमीन का विस्तृत सर्वे और आकलन कराया गया है। इसके बाद परियोजना के लिए बीते 21 मार्च को निविदा भी जारी कर दी गई। हालांकि, जमीन के एक बड़े हिस्से में सरकारी और निजी भूमि के गाटा मिश्रित होने के कारण सटीक सीमांकन और तरमीम में परेशानी आ रही है। इससे परियोजना की आगे की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है।
सीमाएं तय होने से काम पकड़ेगा रफ्तार
अब एनटीपीसी यूपी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के सीईओ किशोर कुमार होता ने डीएम गौरांग राठी को पत्र भेजकर राजस्व अधिकारियों की टीम उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं, उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम की ओर से भी इस संबंध में जिला प्रशासन को पत्र लिखा गया है। एनटीपीसी ने जिला प्रशासन से मांग की है कि संबंधित गांवों में मिश्रित गाटों का सीमांकन और तरमीम प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए। इसके लिए एनटीपीसी के अधिकारियों को भी राजस्व टीम के साथ समन्वय में शामिल करने की मांग है। जमीन की सीमाएं स्पष्ट होने से निविदा प्रक्रिया और काम में तेजी आएगी। यह परियोजना बुंदेलखंड में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
