उत्तर प्रदेश में जमीन और मकान से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां जल्द ही एक ही पोर्टल पर उपलब्ध होंगी। इसके लिए प्रदेश में भारत लैंड स्टैक परियोजना लागू की जाएगी। इस पर भूमि स्वामित्व, भूखंडों की सीमाएं, रजिस्ट्री, भवन निर्माण की स्वीकृति, मास्टर प्लान, भूमि उपयोग, सर्किल रेट, बंधक और न्यायालय में लंबित विवादों का ब्योरा मिलेगा। इससे लोगों को जानकारी के लिए अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में सोमवार को परियोजना की राज्य स्तरीय संचालन समिति की पहली बैठक हुई। उन्होंने कहा कि यह पहल भूमि प्रशासन में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही बढ़ाएगी। परियोजना समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए प्रमुख सचिव, स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन की अध्यक्षता में समिति गठित करने के निर्देश दिए। इसमें राजस्व परिषद समेत संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे। 

अन्य राज्यों के अनुभवों का अध्ययन कर प्रदेश की जरूरतों के अनुसार कार्ययोजना बनाई जाएगी। सभी विभागों को भूमि संबंधी आंकड़ों के डिजिटलीकरण और एकीकरण में तेजी लाने को कहा गया। बैठक में प्रमुख सचिव स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन अमित गुप्ता, मुख्य कार्यपालक अधिकारी इन्वेस्ट यूपी विजय किरण आनंद समेत विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

खरीद-बिक्री में बढ़ेगी पारदर्शिता

आयुक्त एवं सचिव, राजस्व परिषद कंचन वर्मा ने बताया कि भारत लैंड स्टैक जीआईएस आधारित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना है। इसमें भूमि अधिकार अभिलेख, कैडस्ट्रल मैप, ड्रोन व सैटेलाइट तस्वीरें, संपत्ति पंजीकरण, भवन निर्माण स्वीकृतियां, भूमि उपयोग, मास्टर प्लान, सर्किल रेट, किरायेदारी और लीज संबंधी विवरण डिजिटल लेयर के रूप में जोड़े जाएंगे। 

इससे भूमि अधिग्रहण, शहरी नियोजन और संपत्ति कर निर्धारण में आसानी होगी। बिजली-पानी जैसी सुविधाओं का बेहतर प्रबंधन और सरकारी सेवाओं की तेज डिलीवरी भी संभव होगी। मालिकाना हक और कानूनी प्रतिबंधों की जानकारी एक साथ मिलने से जमीन की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता बढ़ेगी।



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