झांसी। महिलाएं सर्वाइकल कैंसर से ज्यादा स्तन कैंसर का शिकार हो रही हैं। इसकी वजह स्तनपान नहीं कराना, बच्चे नहीं होना या देरी से होना है। खास बात यह है कि इसके जानलेवा होने की वजह महिलाओं का शर्म की वजह से शुरूआत में दिक्कत को दबाना या जागरुकता का अभाव है। कैंसर रोग विशेषज्ञ का कहना है कि स्वयं परीक्षण करके महिलाएं शुरुआत में ही कैंसर से निजात पा सकती है।
मेडिकल कॉलेज के कैंसर रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सचिन माहुर ने बताया कि उनकी ओपीडी में स्तन कैंसर का शिकार हुईं महिलाओं का आंकड़ा बढ़ रहा है। गत वर्ष करीब 52 स्तन कैंसर की महिलाएं उपचार के लिए आई कीं। मगर चालू वर्ष में यह संख्या एक सैकड़ा पार कर चुका है।
उन्होंने बताया कि स्तन कैंसर पीड़ित महिलाओं से जब हिस्ट्री पूछी जाती है, तो अधिकांश कई माह से गांठ होने, स्तन का आकार व त्वचा में बदलाव की बात बताती हैं। कुछ महिलाएं शर्म की वजह से समस्या को छिपाए रहती हैं, तो कुछ जागरूकता के अभाव में टालती रहती हैं। समस्या ज्यादा बढ़ने पर वे बताती हैं, मगर तब तक देर हो चुकी होती है। उन्होंने बताया कि स्तन कैंसर के प्रति महिलाओं का जागरूक होना बेहद जरूरी है। जागरूकता से ही वह कैंसर को शुरूआत में ही खत्म कर सकती है।
– ये हैं स्तन कैंसर के शुरुआती लक्षण
-स्तन के आकार में बदलाव होना
-स्तन की त्वचा का रंग बदलना
-निप्पल से असामान्य रिसाव होना
-निप्पल का अंदर की तरफ धंसना
-स्तन में गांठ दिखना
सजगता से बची जान, तो लापरवाही में गंवाई
केस-1 : तालबेहट की 46 वर्षीय महिला ने करीब तीन साल पहले स्वयं स्क्रीनिंग करके कैंसर की जांच कराई। जांच में कैंसर की पुष्टि हुई, मगर पहले स्टेज का निकला। उसकी कीमोथैरेपी व रेडियो थैरेपी हुई। इसके बाद एक साल तक दवाएं चलीं। अब उसे कैंसर से मुक्ति मिल गई है।
केस:2 : कोतवाली थाना क्षेत्र की 55 वर्षीय महिला को करीब ढाई साल से स्तन में दिक्कत थी। जागरुकता के अभाव की वजह से वह शुरुआत में टालती रही। जब दिक्कत बढ़ी तो शर्म की वजह से परिवार में नहीं बताया। असामान्य रिसाव होने लगा, तब पति उपचार के लिए लेकर आया, लेकिन तब तक काफी देर हो गई। हरसंभव उपचार के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका।
