झांसी। कंपनी में पैसा निवेश कराने का प्रलोभन देकर और फर्जी बॉन्ड व चेक तैयार कर 33 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में अदालत ने दो दोषियों को सात-सात साल के कारावास की सजा सुनाई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधा यादव की अदालत ने 31 अक्तूबर को फैसला सुनाते हुए दोनों पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, सहारनपुर निवासी करुणेश शर्मा और अमृतसर निवासी रमनदीप सिंह ने कंपनी में पैसा निवेश करने पर बेहतर लाभ मिलने का झांसा दिया था। दोनों ने पीड़ित को विश्वास में लेने के लिए फर्जी बॉन्ड और चेक भी तैयार किए। इन दस्तावेजों के आधार पर उन्होंने निवेश के नाम पर 33 लाख रुपये हासिल कर लिए। बाद में जब पीड़ितों को ठगी का अहसास हुआ तो रुपये वापस मांगे, लेकिन आरोपियों की ओर से रकम वापस नहीं की गई।

इसके बाद टहरौली थाना क्षेत्र निवासी जितेंद्र कुमार ने दोनों आरोपियों के खिलाफ पुलिस से शिकायत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने 11 नवंबर, 2014 को मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अमानत में खयानत सहित धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं में कार्रवाई की। विवेचना के दौरान सामने आए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने दोनों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने उपलब्ध साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए। फर्जी बॉन्ड और चेक तैयार कर निवेश के नाम पर रकम लेने से जुड़े तथ्यों को भी न्यायालय के समक्ष रखा गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने करुणेश शर्मा और रमनदीप सिंह को दोषी करार दिया।

सीजेएम ने दोनों दोषियों को अलग अलग धाराओं में सात-सात वर्ष के कारावास और पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। करीब 12 वर्ष पुराने इस मामले में आए फैसले से निवेश के नाम पर की गई धोखाधड़ी के मामले में न्यायिक कार्रवाई पूरी हुई।



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